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झूठइ लेना झूठइ देना, झूठइ भोजन झूठ चबेना : lies and shamelessness

झूठइ लेना झूठइ देना, झूठइ भोजन झूठ चबेना : lies and shamelessness

झूठइ लेना झूठइ देना, झूठइ भोजन झूठ चबेना : lies and shamelessness

राजनीतिक झूठ देश के लिये बहुत ही भयावह है और भयावह स्थिति ये है कि ये झूठ नेताओं तक ही सीमित नहीं है जनता तक पैठ कर चुकी है उसमें भी उस परिवार तक जिसका बच्चा देश रक्षा के लिये वीरगति को प्राप्त हो गया। एक ओर बच्चा वीरगति को प्राप्त हो गया और दूसरी ओर परिवार बार-बार झूठ बोलकर अपने बच्चे जिसने देश के लिये बलिदान दिया उस बलिदान को भी व्यर्थ कर रहा है, उसका राजनीतिक दुरुपयोग और वो भी झूठ बोलकर कर रहा है। आइये समझते हैं बलिदानी अग्निवीर के परिवार का झूठ।

झूठइ लेना झूठइ देना, झूठइ भोजन झूठ चबेना : lies and shamelessness

झूठ और निर्लज्जता, फिर झूठ झूठ और झूठ की ऐसी कड़ी देखने के बाद लगता है हमें भी सामान्य नियम से अलग हटकर इस आलेख में आगे बढ़ना चाहिये। सामान्य नियम है प्रश्न को उत्तर, यहाँ हम इसके विपरीत चलेंगे उत्तर का प्रश्न निकालेंगे। जब देश चलाने वालों द्वारा उलटी गंगा बहाई जा रही है, चौबीसों घंटे झूठ पर झूठ ही बोला जा रहा है, तो हम भी इतना उलटा काम तो कर ही सकते हैं न।

राजनीति और झूठ के संबंध का प्रश्न

उत्तर : राजनीति करने वाले सभी दल और नेताओं ने एक तथ्य को गांठ बांध कर सच मान रखा है कि राजनीति करने के लिये झूठ बोलना ही पड़ता है। इस तथ्य को सत्य मान रहे हैं सोचो जब देश चलाने वाले का आधार ही असत्य हो तो देश कहां जायेगा। कोई भी दल सत्ता में हो वो इस राजनीतिक झूठ के ऊपर प्रहार करना नहीं चाहता क्योंकि आज सत्ता में है कल विपक्ष में होगा और इसलिये उसे भी झूठ का सहारा लेना पड़ेगा। तात्पर्य यह कि देश चलाने वाले झूठ के आधार पर सत्ता प्राप्त करते हैं और झूठ को ही सत्ता की चाबी मानते हैं।

जो भी सत्ता में होता है वह मात्र स्वयं के लिये विचार करता है कि उसे भी झूठ बोलने की आवश्यकता होगी, वो ये नहीं सोचता की प्रतिद्वंदी पर भी यह नियम प्रभावी होगा। यदि इस प्रकार से विचार किया जाय कि राजनीतिक झूठ के विरुद्ध बनाया विधान सभी पक्षों पर समान रूप से प्रभावी होगा तो संभवतः बनाया जा सकता है। साथ ही यह भी नियम होना आवश्यक होगा कि झूठ के आधार पर विजयी घोषित होने वाला प्रत्याशी पराजित माना जायेगा कर पराजित को विजित एवं झूठ बोलकर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी के लिये कठोर दंड का भी विधान होना चाहिये।

प्रश्न : झूठ के लिये कोई देश ने कोई कानून क्यों नहीं बनाता ?

राजनीतिक झूठ का जनता पर प्रभाव

झूठ का विशेष नियम है बारम्बारता और अप्रत्याशित प्रसार। असत्य की सत्ता इसी से होती है कि वह बारम्बारता करे, और अत्यधिक विस्तार करे अर्थात प्रसारित हो। यदि प्रसारित नहीं हुआ तो अथवा बरम्बारता न हुयी तो उसकी सत्ता ही नहीं स्थापित होगी। सत्य की सत्ता स्वतः सिद्ध होती है और इसे बारम्बारता की भी अपेक्षा नहीं होती, सत्य को कितना भी नीचे या अन्य ग्रहों पर छुपा दिया जाय वह प्रकट हो ही जाता है, और सत्य के प्रकट होते ही असत्य समाप्त हो जाता है। असत्य के प्रमाण भी असत्य ही होते हैं किन्तु सत्य के प्रमाण भी सत्य ही होते हैं।

झूठ का उद्देश्य क्षणिक सुरक्षा, लाभ आदि प्राप्त करना होता है जो कई बार स्थायी भी होता है। यदि झूठ बोलकर आपको एक बार ही सही करोड़ों रूपये मिल जायें और बाद में झूठा सिद्ध होने के बाद भी वो रूपया सुरक्षित ही रहे, सत्ता मिल जाये और बाद में झूठा सिद्ध होने पर भी सत्ता बनी ही रहे तो झूठ की प्रवृत्ति अवश्य बढ़ेगी। झूठ की प्रवृत्ति पर अंकुश तब लगेगा जब झूठा सिद्ध होने पर जो लाभ मिला उससे वंचित और दण्डित भी किया जाये।

राजनीतिक झूठ का प्रसार नेताओं से जनता तक भी होता है और मात्र प्रसार ही नहीं होता अपितु जनता को भ्रमित करके झूठ के दलदल में फेंका भी जाता है। कितना बड़ा अपराध है यह लेकिन इसके विरुद्ध सरकार हो, विधायिका हो या न्यायपालिका हो कोई कुछ करने को तैयार ही नहीं है। राजनीतिक झूठ जनता तक प्रसारित किया जाता है और जनता को भी झूठ के दलदल में फंसाया जाता है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है बलिदानी अग्निवीर अजय सिंह का परिवार।

बलिदानी अग्निवीर अजय सिंह का परिवार

सामान्य लोग स्वभावतः झूठ नहीं बोलते उसमें भी जब झूठ बोलने से कोई लाभ न दिखे तो झूठ बोलने वाले भी झूठ नहीं बोलते। सत्य बोलना ही भारत के लोगों का स्वभाव है। किसी कारणवश निहित स्वार्थ के लिये ही कुछ लोग झूठ बोला करते थे, अधिकांशतः निहित स्वार्थ के लिये भी झूठ बोलना पाप समझते थे और नहीं बोलते थे। सत्य और धर्म एक दूसरे से इस प्रकार जुड़े हुये हैं कि अलग हो ही नहीं सकते।

जब धर्म की बात हो तो देश के लिये बलिदान देना भी धर्म ही सिखाता है, यदि धर्म को हटा दिया जाय तो कोई भी देश के लिये बलिदान देने के लिये तैयार नहीं होगा। धर्म ही सिखाता है कि देशरक्षा धर्म है और वीरगति प्राप्त करना सौभाग्य की बात होती है। वीरगति प्राप्त करने वाले स्वर्ग के अधिकारी होते हैं।

बलिदानी को तो राजकीय सम्मान और सामाजिक सम्मान प्राप्त होता ही है किन्तु उसके परिवार को भी सम्मान प्राप्त होता है, गर्वान्वित होता है। सरकार द्वारा दिया गया अनुदान कोई कृपा नहीं होती और न ही उससे सरकार, समाज या देश उऋण हो पाता है, अपितु बलिदानी के परिवार का भी देश और समाज पर ऐसा ऋण चढ़ जाता है जिसके लिये मात्र कृतज्ञता प्रकट करता है।

स्वभावतः कोई भी परिवार अपने बलिदानी बच्चे के ऋण से दबे और कृतज्ञ समाज व देश को नीचा दिखाने का प्रयास नहीं करता अपितु यदि और बच्चे हों तो और भी देने के लिये तैयार रहता है। देश की रक्षा के लिये बलि देना धर्म अर्थात कर्तव्य मानता है। अर्थात देश और समाज तो कृतज्ञता प्रकट करता है यह जताता है कि ऋणी है किन्तु कोई भी परिवार या जनता यह नहीं जताता कि उसने देश का, समाज का उपकार किया है अपितु वह ये मानता है कि वो भी देश का ऋणी है और उसने स्वयं के ऋण को उतारा है।

लेकिन बलिदानी अग्निवीर अजय सिंह का परिवार धर्म और सत्य से च्युत होकर, देश और समाज के ऋण को अस्वीकार करते हुये ही नहीं नीचता और स्वार्थ की सभी सीमाओं को लांघते हुये सेना, सरकार, देश और समाज को भी कलंकित करने पर उतारू हो गया। किन्तु ये स्वाभाविक नहीं है, ऐसा करने के लिये प्रेरित किया गया है, या तो दबाव बनाया गया है अथवा बड़ा प्रलोभन दिया गया है। प्रलोभन या दबाव बनाने वाला कौन है, वही सनातन द्रोही जिसने संसद में कहा हिन्दू मतलब हिंसा।

प्रश्न : बलिदानी अजय कुमार के परिवार ने झूठ क्यों बोला, देश, सेना, समाज को कलंकित क्यों किया ?

दबाव या प्रलोभन

दबाव तो कई प्रकार के बनाये जा सकते हैं किन्तु यदि प्रलोभन से काम बने तो दबाव नहीं बनाया जाता। जहां तक प्रलोभन की बात है तो आर्थिक प्रलोभन की संभावना नहीं बनती है, किन्तु ये नहीं कहा जा सकता कि आर्थिक प्रलोभन नहीं दिया गया होगा, मात्र ये कहा जा सकता है कि आर्थिक प्रलोभन की संभावना न के बराबर बनती है। तो शेष बचता है राजनीतिक प्रलोभन, राजनीतिक प्रलोभन का तात्पर्य नेता बनाना, बड़ा पद देना या दिलवाना हो सकता है।

ये है राजनीतिक झूठ को जनता तक फैलाना, सामान्य जनता नहीं जिस परिवार ने देश के लिये बलि दिया उस परिवार तक को झूठ के दलदल में फंसाना। ये नहीं माना जा सकता कि झूठ और झूठ बलिदानी अग्निवीर अजय सिंह के परिवार की प्रवृत्ति है। यही संभावना है कि उसे राजनीति ने झूठ और झूठ बोलने के लिये प्रेरित किया। यदि देश की राजनीति ऐसे होगी तो इस प्रकार की राजनीति, लोकतंत्र, संविधान, संविधान रक्षिका न्यायपालिका सभी धिक्कार के योग्य सिद्ध होंगे।

ऐसा भी हो सकता है कि उस झूठे परिवार और उसे झूठ के दलदल में फंसाने वाले नेता के विरुद्ध ये सभी कुछ न करें अपितु विपरीत जाते हुये सत्य बताने वाले के विरुद्ध ही काम करें।

झूठ और झूठ फिर पत्रकार पर प्रहार

झूठ की राजनीति करने वालों का अहंकार इतना बड़ा है कि वो चौड़े में झूठ भी बोलेंगे और उनके झूठ को कोई झूठ भी न कहे। वो जो बोले वही सच माना जाय क्योंकि वो उस परिवार से है जिसके सभी पूर्वज देश के प्रधानमंत्री रहे हैं और वो भी भविष्य में प्रधानमंत्री बनने की संभावना रखता है।

क्या इस विशेष प्राणी की घनघोर निंदा करके ही छोड़ देना चाहिये ? क्या उस परिवार को इसलिये छोड़ देना चाहिये जिसने देश और सेना को कलंकित किया, अपमानित किया ?

जिस प्रकार बलिदान होने के कारण 98 लाख दिया जा चुका है और 67 लाख और दिया जाना है। उसी प्रकार सेना को कलंकित और अपमानित करने का दण्ड भी क्यों नहीं मिलना चाहिये। दण्ड मात्र उस परिवार को ही नहीं उकसाने वाले को भी क्यों नहीं मिलना चाहिये ? क्या इसलिये दण्डित नहीं किया जा सकता क्योंकि नरेंद्र मोदी विशेष प्राणी से डरते हैं।

राजनीतिक झूठ पर सेना को सफाई देनी पड़ी

राजनीतिक झूठ इस तरह से बवंडर बना की संसद तक गूंजा और सेना को सफाई देने की आवश्यकता पर गई।

सेना के संबंध में यदि कोई झूठ बोलता हो, सेना को कलंकित या अपमानित करने के प्रयास करता हो तो जैसे न्यायपालिका को अवमानना के प्रति दण्डित करने का अधिकार है उसी प्रकार सेना को भी होना चाहिये और सेना स्वयं दण्ड का निर्धारण करे। देश के शत्रु मात्र वो नहीं हैं जो सीमा के पार होते हैं, देश के शत्रु सीमा के भीतर भी रहते हैं और देश के शत्रु को न्यायपालिका द्वारा नहीं सेना द्वारा ही दंड का विधान बनाया जाना चाहिये।

सेना को मन हो तो चौराहे पर टांगकर गोलियों से भून दे या रस्से से बांधकर तब तक घसीटे जब तक कि मर न जाये। देश के शत्रुओं के प्रति कोई मानवता नहीं, कोई दया नहीं, कोई सिद्धांत नहीं सेना अपने तरीके से व्यवहार करे ये खुली छूट होनी चाहिये।

प्रधानमंत्री मोदी के प्रति

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