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    राष्ट्रपति का अभिभाषण वास्तविकता का चित्रांकन

    राष्ट्रपति का अभिभाषण वास्तविकता का चित्रांकन

    एक समय ऐसा था जब वास्तविकता जानते हुये भी उसे प्रकट नहीं किया जाता था अर्थात छुपाने का प्रयास न हो तो भी प्रकट करने से बचा जाता था। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में देश की वर्त्तमान स्थिति का वास्तविक चित्रांकन किया गया।

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    पहला दिन पहला प्रहार, टूट गया झूठा अहंकार

    पहला दिन पहला प्रहार, टूट गया झूठा अहंकार – condemnation of emergency

    पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को आपातकाल लगाया था, देश को जेल बना दिया था, संविधान को ताक पर रख दिया था, मीडिया पर ताला लगा दिया था, तानाशाही किया था इत्यादि तथ्य जैसे ही सामने आते है उनके पोते का मोदी पर तानाशाही का आरोप लगाना, संविधान संविधान चिल्लाना सब दिखाबा सिद्ध हो जाता है।

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    लोकतंत्र और स्वस्थ लोकतंत्र

    स्वस्थ लोकतंत्र का तात्पर्य डिप्टी स्पीकर पद विपक्ष को देना है या …

    यदि स्वस्थ लोकतंत्र पर गंभीर विचार किया जाय तो राजनीतिक दल होना ही नहीं चाहिये। जनता मात्र एक योग्य प्रतिनिधि का चयन करती, फिर सभी प्रतिनिधि सुयोग्य नेता को प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष आदि चयन करके बनाती। राजनीतिक दल के कारण भी योग्य व्यक्ति का चुनाव नहीं होता है। अर्थात जब तक दलगत राजनीति चलेगी तब तक लोकतंत्र को स्वस्थ कहा ही नहीं जा सकता।

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    संविधान की रक्षा कौन करेगा

    संविधान की रक्षा कौन करेगा

    कांग्रेस आज संविधान की रक्षा करने की बात करती है, हाथों में संविधान लेकर नेता फोटो खिंचवाते हैं, “संविधान की रक्षा कौन करेगा – हम करेंगे, हम करेंगे” का नारा लगाती है उसके नारे, फोटो, वक्तव्यों पर विश्वास करना मूर्खता के अतिरिक्त और कुछ नहीं होगा। एक विवेकी जन को कांग्रेस का इतिहास पता करना चाहिये कि आज विपक्ष में होने पर जो दावा कर रही है जब सत्ता में थी तब ऐसा कुछ किया भी था या नहीं ?

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