
मोदी की गारंटी है
सरकार बनी भी नहीं है और जदयू टांगखिंचाई करने में जुट गई है। अग्निवीर योजना, जातीय जनगणना, UCC जैसे विषयों पर जदयू ने मीडिया के माध्यम से विचार प्रकट करना शुरू कर दिया है।
सरकार बनी भी नहीं है और जदयू टांगखिंचाई करने में जुट गई है। अग्निवीर योजना, जातीय जनगणना, UCC जैसे विषयों पर जदयू ने मीडिया के माध्यम से विचार प्रकट करना शुरू कर दिया है।
बहुमत NDA को ही मिला है और प्रधानमंत्री भाजपा का ही बनेगा यह मानता है कि मोदी न बनें कोई और बने यह चाहता है। अल्पमत वाली भाजपा के भी प्रधानमंत्री मोदी बनने जा रहे हैं इसके तीन महत्वपूर्ण कारणों की चर्चा
जब RSS सनातन के संदर्भ में ऐसी धारणा रख सकती है कि “जो RSS कहे वही सही, शास्त्र वचन आई-गई” तो राष्ट्रहित-राष्ट्रवाद में तो निश्चित रूप से ऐसा कर सकती है क्योंकि वहां तो कोई शास्त्र है ही नहीं।
मोदी वो कच्चा खिलाड़ी नहीं है जो एक गिरने वाली सरकार के प्रधानमंत्री पद की शपथ ले। मोदी यदि प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते हैं तो इसका तात्पर्य ही होगा कि सरकार 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा करेगी।
देशहित में सत्ता काम करे विपक्ष की ऐसी भूमिका होनी चाहिये या सत्ता पाने के लिये विपक्ष गली का गुंडा बन जायेगा। और यदि विपक्ष इसी प्रकार गुंडागर्दी करती रही तो जनता में आक्रोश उत्पन्न होगा या नहीं ? यदि जनता आक्रोशित हो गयी तो विपक्ष की क्या दुर्गति होगी ?
विपक्षियों ने किसी तरह इतना साहस जुटा लिया की एग्जिट पोल को नकार सकें और सरकारी सर्वे या भाजपा का सर्वे बता सकें, किन्तु अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम विधानसभा का चुनाव परिणाम ऐसे आये हैं कि चक्कर खा रहे होंगे।
चुनाव के उपरांत नयी विधायिका (लोकसभा) और कार्यपालिका (सरकार) के जीवन का आरम्भ होने जा रहा है जिसके लिये मात्र मोदी को ही नहीं सभी प्रतिभागी राजनीतिक दलों व नेताओं को मंगलाचरण करना चाहिये।
मोदी जिस दिन काशी प्रत्याशी बनने के लिये नामांकन करने वाले थे उस दिन उन्होंने एक साक्षात्कार में वक्तव्य दिया था “मुझे परमात्मा ने भेजा है” और इससे पहले मोदी ने मां की चर्चा करते हुये बॉयोलॉजिकल मां कहा था।
राहुल गांधी के आज का भाषण पूरी तरह से भाजपा का प्रचार करने जैसा था मानो ऐसा लग रहा है जैसे राहुल गांधी भी कांग्रेस छोड़कर भाजपाई बन गए हों। आगे हम उन तथ्यों को भी समझेंगे जो भाजपा का प्रचार था और उसे भी समझेंगे जो बोलने में भूल कर रहे थे।
यद्यपि पहले से विपक्ष को भी पता है कि यही होने वाला है और एक परीक्षित कारण EVM का राग अलापना रहा है। दुर्भाग्य ये है कि इसके अतिरिक्त कोई और राग विपक्ष को मिल भी नहीं रहा है
राहुल गांधी ने कुछ ही वर्षों में खटाखट-खटाखट कांग्रेस की खटिया खड़ी करने लगे थे और मटामट-मटामट मटिया-मेट करते उससे पहले सोनियां गांधी ने मोर्चा सम्हाला, फिर लबालब-लबालब लबने वाले खड़गे (मल्लिकार्जुन खड़गे) को 2024 में होने वाली हर की मटकी फटाफट-फटाफट फोड़ने के लिये अध्यक्ष बना दिया।
विपक्ष को अभी भी चाहिये कि ज्ञानवापी, मथुरा कृष्ण जन्मभूमि आदि को देश की सांस्कृतिक विरासत स्वीकारे और विवाद का संवाद से शीघ्र समाधान हो ऐसा प्रयास करे। भगवा को, देश के ग्रंथों को सांप्रदायिक कहना बंद करे। कुर्ते पर जनेऊ धारण करने से देश विपक्ष को सनातनी नहीं स्वीकारेगा।
जब बात पाकिस्तान की आयी तो मोदी ने कहा कि पाकिस्तान की दुर्गति उन्हें ज्ञात है और यह भी ज्ञात है कि पाकिस्तान की दुर्गति का कारण वो स्वयं हैं।
हमें संबित पात्रा जो पद्मश्री कैलाश शेखर के साथ भगवती की स्तुति कर रहे हैं उस विडियो का गंभीरता से अवलोकन करना होगा और इससे स्पष्ट हो जायेगा कि संबित पात्रा कालनेमी है या नहीं। यह विडियो संबित पात्रा ने अपने X पर साझा किया है।